29 नवंबर 2025 अपडेटेड 30 नवंबर 2025
गौहाटी हाई कोर्ट के एक आदेश के बाद एआईयूडीएफ़ यानी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक अमीनुल इस्लाम शुक्रवार को जेल से बाहर आ गए.
दरअसल विधायक इस्लाम पिछले सात महीने से ज़्यादा समय से नौगांव की एक जेल में बंद थे.
गौहाटी हाई कोर्ट के जस्टिस कल्याण राय सुराणा और सुरेश मजूमदार की डिविज़न बेंच ने बीते गुरुवार को इस मामले की सुनवाई के बाद विधायक की हिरासत के आदेश रद्द कर दिए थे.
कोर्ट ने इसके साथ ही यह निर्देश दिया कि अगर किसी दूसरे मामले में उनकी ज़रूरत नहीं है तो उन्हें तुरंत रिहा कर दिया जाए.
पढ़ना जारी रखें
असम के धींग विधानसभा क्षेत्र से लगातार तीन बार विधायक बने इस्लाम को राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) के तहत इतने लंबे समय तक हिरासत में रखा गया.
उन्हें 24 अप्रैल को एक राजनीतिक रैली में दिए गए बयान के लिए गिरफ्तार किया गया था.
उन पर आरोप लगा कि 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए हमले के लिए उन्होंने अपनी रैली में केंद्र की बीजेपी सरकार पर "साज़िश" रचने की बात कही थी.
इस रैली में उनके विवादित भाषण का वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा में रहा.
अमीनुल इस्लाम ने जेल से बाहर आने पर क्या कहा?
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma इमेज कैप्शन, रिहाई के बाद अमीनुल इस्लाम
जेल से बाहर निकले विधायक इस्लाम शनिवार को असम विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भाग लेने पहुंचे थे.
उन्होंने पहलगाम हमले को लेकर बीजेपी सरकार पर "साज़िश" रचने वाले बयान के आरोप पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, "मैंने केंद्र की सत्ता संभाल रही बीजेपी सरकार द्वारा साज़िश रचने की बात नहीं कही थी.
लेकिन मैंने यह ज़रूर कहा था कि पहलगाम हमले के दौरान वहां हमारे सुरक्षा जवान क्यों नहीं थे.
"
"पहलगाम कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य का एक इंटरनेशनल पर्यटन स्थल है, फिर वहां सुरक्षा के इंतज़ाम क्यों नहीं थे.
आतंकियों ने हमारे इतने सारे नागरिकों को कैसे मार दिया.
मैंने इसके लिए देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को ज़िम्मेदार ठहराया था.
साथ ही मैंने पहलगाम हमले की ठीक तरीक़े से जांच की मांग की थी.
"
अमीनुल इस्लाम ने कहा, "लेकिन यहां की सरकार ने मेरे बयान को पाकिस्तान का समर्थन करने वाला बताया और मुझ पर मामले दर्ज कर दिए.
जबकि पहलगाम हमले को लेकर सोशल मीडिया से संसद तक हर कोई यही सवाल उठा रहा था.
लेकिन उन्होंने मुझे जेल में डाल दिया.
"
हालांकि, अमीनुल इस्लाम को इस मामले में 14 मई को ही ज़मानत मिल गई थी.
मगर उसी दिन उन्हें एनएसए के तहत हिरासत में ले लिया गया.
बाद में 3 जुलाई को एनएसए के लिए बने एडवाइज़री बोर्ड ने उन्हें एक साल के लिए हिरासत में रखने की इजाज़त दे दी थी.
अमीनुल इस्लाम के विवादित बयान का वीडियो जब सामने आया तो बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने इस पर नाराज़गी ज़ाहिर की थी.
पुलिस ने "ग़लत जानकारी और नफ़रत फैलाकर लोगों में अशांति फैलाने" के आरोपों के तहत अमीनुल इस्लाम के ख़िलाफ़ बीएनएस की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था.
नौगांव के पुलिस अधीक्षक स्वप्निल डेका ने उस दौरान पुष्टि की थी कि पुलिस ने सामने आए वीडियो के आधार पर कार्रवाई की थी.
हालांकि गिरफ्तारी और एनएसए के तहत हिरासत से जुड़े एक सवाल पर विधायक इस्लाम कहते हैं, "मुझ पर कार्रवाई के तहत जो भी आरोप लगाए गए थे, उसके लिए 15 दिन बाद 14 मई को कोर्ट ने मुझे ज़मानत दे दी थी.
लेकिन उसी दिन मुझ पर एनएसए लगा दिया गया.
यह मौजूदा बीजेपी सरकार की ज़्यादती नहीं है तो और क्या है?
मुझे अब लगता है कि सरकार ने यह ज़्यादती इसलिए की क्योंकि मैं दाढ़ी रखने और टोपी पहनने वाला मुसलमान हूं.
मैंने यह बात पुलिस अधीक्षक से भी पूछी थी.
"
विधायक इस्लाम यह भी आरोप लगाते हैं कि जिस तरह से एनएसए के तहत उनको एक साल के लिए हिरासत में भेजा गया था, उससे उनका राजनीतिक करियर ख़तरे में पड़ जाता.
वह कहते हैं, "मैं बीते सात महीनों से अपने क्षेत्र का कोई काम नहीं कर पाया हूं.
लोगों से मिल नहीं पाया हूं.
अगर मुझे एक साल जेल में रखा जाता तो विधानसभा चुनाव के बाद ही मैं बाहर आ पाता.
लेकिन मुझे अदालत से न्याय मिला है.
"
"मैं अपने क्षेत्र में कई सारी विकास समितियों का अध्यक्ष हूं लेकिन 7 महीने से मेरे दस्तख़त के बिना कई ज़रूरी काम ठप पड़ गए. 更多阅读 面对不安全和非正常移民危机,秘鲁将在与智利边境部署士兵。
बीजेपी उन लोगों के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई करती है जो उनसे सवाल पूछते है.
मैंने आज भी विधानसभा में कई विधेयकों पर चर्चा के दौरान सरकार से सवाल पूछे हैं.
आगे भी सवाल पूछता रहूंगा.
"
क्या कहता है क़ानून?
इमेज स्रोत, Dilip Kumar Sharma इमेज कैप्शन, एनएसए क़ानून राज्य सरकारों को किसी भी शख़्स को हिरासत में लेने की शक्तियां देता है
राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून को 1980 में लाया गया था.
यह केंद्र और राज्य सरकारों को ऐसी शक्तियां देता है जिसके तहत राष्ट्र हित में किसी भी शख़्स को बिना सूचना हिरासत में लिया जा सकता है.
इस क़ानून में बिना ट्रायल के किसी शख़्स को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है.
关于根据国家安全局和高等法院的命令拘留 MLA Islam 的问题,高级律师 AR Bhuyan 告诉 BBC 印地语新闻,高哈蒂高等法院已取消根据《国家安全法》对 MLA Aminul Islam 的拘留,称该州的行为在程序上是非法的,在宪法上也是不可持续的。
,
他说:“法院承认,拘留官员无法拿出任何具体理由来证明预防性拘留的合理性。
这似乎也不是什么新的威胁。
这个命令是机械性的,没有表现出大脑的使用,这违反了 NSA 的必要条件。
,
Bhuiyan律师在解释法院命令时表示:“这一判决是对国家的重要提醒,预防性拘留不能作为政治或行政捷径,必须充分尊重宪法保障。
,
印度人民党说了什么?
图片来源,Dilip Kumar Sharma 图片说明,印度人民党领导人维杰·古普塔否认阿米努·伊斯兰提出的宗教歧视指控
印度人民党已证明在国家安全局的监管下拘留 AIUDF MLA Islam 的行动是合理的。
阿萨姆邦印度人民党高级领导人维贾伊·库马尔·古普塔 (Vijay Kumar Gupta) 告诉 BBC,Dheang MLA Aminul Islam 经常做出这样的事情,试图用他的言论煽动特定社区。
但我们不会放过任何破坏社区和谐的人。
因此对他采取了法律行动。
,
他还表示,“如果他今后再次发表此类有争议的言论,我国政府一定会再次采取严厉行动。
这次他得到了高等法院的救济,但如果他不停止自己的行为,那么将对他采取最严厉的行动。
,
关于因 MLA 的宗教信仰而对其采取行动的指控,印度人民党领导人表示,这与任何穆斯林 MLA 无关。
对于任何毒害我们社会环境的省议员,无论其种姓或社区如何,都将采取严厉行动。
,